Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अलीकमेव त्वद्भावो मद्भावोऽलीकमेव च ।
अनुभूतोऽप्यसद्रूपः स्वप्ने स्वमरणं यथा ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वप्न में अनुभूत अपना
मरना जैसे अलीक (अवास्तविक) है, वैसे ही अनुभूत होता हुआ भी असद्रूप आपका भाव (राम शरीर
भाव) अलीक ही है और मेरा भाव (वसिष्ठ शरीर भाव) भी अलीक ही है