Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
मृतो बन्धुर्यथा स्वप्नेऽप्यनुभूतोऽप्यसन्मयः ।
मृतोऽयमिति चेज्ज्ञप्तिर्भवेदेवमिदं जगत् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मरा हुआ अपना
बन्धु स्वप्न में दृष्टिगोचर भी हो जाय, तो भी यह मर गया है, ऐसा यदि ज्ञान हो, तो वह असन्मय ही है
वैसे ही अनुभूत यह जगत् भी असन्मय ही है