Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अबुद्धविषये ह्येषा राम वाक्प्रविराजते ।
बुद्धस्यास्मीति रूपेण किल नास्त्येव किंचन ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
तब कहाँ पर उपदेश वचन सुशोभित होते है, इस पर कहते हैं।
हे श्रीरामचन्द्रजी, यह उपदेश वाणी अपने प्रबुद्ध के विषय में ही सुशोभित होती हे । जो पुरुष पूर्ण
प्रबुद्ध हो गया । उसको तो “अस्मि' (मैं हूँ), इस प्रकार अहंकारास्पदरूप से परामर्श करने के लिए कुछ
भी नहीं हे, इसलिए वह भी उपदेश के योग्य नहीं है।
इस ग्रन्थ के आरम्भ मेँ कहा भी है । ' नाऽत्यन्तमज्ञो नो तज्ज्ञः सोऽस्मिन् शास्त्रऽधिकारवान् ।*
अर्थात् वह जो न अत्यन्त अज्ञानी है और न पूर्ण ज्ञानी है, वह इस शास्त्र में अधिकारी है