Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

ब्रह्मेवेदं परं शान्तमित्येवानुभवन्सुधीः । अपह्नवः स्वानुभूतेः कर्तुं तस्य क्व युज्यते ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं हूँ", यह बोध करने की शक्ति न होने से जैसे अहंब्रह्मास्मि“ इस वाक्यार्थ बोध में पूर्ण ज्ञानी का अधिकार नहीं है वैसे ही निषेध्य वस्तु के न होने से नेति नेति इस अपह्ृव वाक्यार्थ बोध में भी ज्ञानी का अधिकार नहीं है, ऐसा कहते हैं। यह सब शान्त परम ब्रह्म ही है, ज्ञानी इस प्रकार अनुभव करता है । उसकी अपनी अनुभूति का अपलाप कौन कर सकता है २