Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
सत्यं संवेदनं शुद्धं बोधाकाशं निरञ्जनम् ।
सत्यं सर्वगतं शान्तमस्त्यनस्तमयोदयम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
तब क्या सत्य है ? उसे कहते हैं।
शुद्ध, सर्वगत, शान्त, निर्विकार चिदाकाश ज्ञान के समान शास्त्रदृष्टि से भी सत्य है, विद्वानों के
अनुभव से भी सत्य है और यौक्तिकदृष्टि से भी वही अन्तरहित उदय से युक्त हे