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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

तस्मान्नेमे वयं सत्या नच दामादयः क्वचित् । असत्यास्ते वयं चेमे नास्ति नः खलु संभवः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसे अन्य आत्मा का (संसारी देहात्मा का) निश्चय है उसे अन्य आत्मा का (असंसारी आत्मा का) उपदेश तो व्यर्थ है, इसमें दृष्टान्त देते हैं। ये प्रत्यक्ष दिखलाई दे रहे वसिष्ठ, राम आदि देहरूप से प्रसिद्ध हम लोग एवं दाम आदि शास्त्र दृष्टि से भी सत्य नहीं है, वे और ये हम लोग विद्वदनुभव दृष्टि से भी सत्य नहीं है। हम लोगों का सम्भव है ही नहीं यानी यौक्तिकदृष्टि से भी हम लोग असत्य हें