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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verses 29–30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verses 29–30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 29,30

संस्कृत श्लोक

मिथ्याहंतामयो मूढः सत्यैकात्ममयः सुधीः । युज्यते न क्वचिन्नाम स्वभावापह्नवोऽनयोः ॥ २९ ॥ यो यन्मयस्तस्य तस्मिन्युज्यतेऽपह्नवः कथम् । पुरुषस्य घटोऽस्मीति वाक्यमुन्मत्तमेव हि ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त विषय को ही संक्षेप से स्पष्टतया कहते हैं। मूढ मिथ्या अहंकारमय है और ज्ञानी एकमात्र सत्यतत्त्वमय है, इन दोनों के स्वभाव का अपलाप कहीं पर कोई भी नहीं कर सकता । जिसका जैसा स्वभाव रहता है, उसमें उसका अपलाप कैसे हो सकता है ? पुरुष का “मे घट हूँ” यह वाक्य उन्मत्त प्रलाप नहीं तो और क्या है ?