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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

क्व धैर्यममरानीकविद्रावणकरं महत् । क्व किरातमहीपालक्षुद्रकिङ्कररूपता ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

कहाँ देवताओं की सेना को भगानेवाला वह महान धैर्य और कहाँ किरात राज की क्षुद्र सेवकता ?