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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

क्व नाम निरहङ्कारचित्सत्त्वोदारधीरता । क्व मिथ्यावासनावेशादहङ्कारकुकल्पना ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

कहाँ निरहंकार चिन्मय सत्व की उदार धीरता और कहाँ मिथ्या वासना के आवेश से अहंकार की कुकल्पना ?