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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अहङ्कारमतो राम मार्जयान्तः प्रयत्नतः । अहं न किंचिदेवेति भावयित्वा सुखी भव ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, आप अपने अन्तःकरण से अहंकार को प्रयत्नपूर्वक हटा दीजिये। मैं कुछ भी नहीं हूँ, ऐसी भावना कर सुखी होइये। भाव यह कि जड़ दृश्य में सर्वत्र चिन्ता का ही दर्शन होता है, अतः उसमें अहन्त्व का योग नहीं है, अहंकार आदि सबके साक्षी द्रष्टास्वरूप में अभिमानरूप धर्म का सम्भव न होने से अहन्त्व हो नहीं सकता द्रष्टा और दृश्य से अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, इसलिए अहन्त्व का आश्रय कुछ भी नहीं है, ऐसी यथार्थ रूप से भावना कर सुखी होइये