Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
सतामप्यसतामेव बालयक्षपिशाचवत् ।
दामव्यालकटादीनां दुःखस्यान्तः कथं भवेत् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे मुनिवर, बालकों के यक्ष ओर पिशाच की नाई अज्ञानियों की दृष्टि से
सत् होते हुए भी वास्तव में असत् दाम, व्याल और कट के दुःख का अन्त कब होगा ?
सर्ग सन्दर्भ
इकतीसवाँ सर्ग समाप्त बत्तीसवाँ सर्ग मछली ओर सारस के जन्म की प्राप्ति से वियुक्त हुए दाम आदि की राजमहल में मच्छर आदि के शरीरों में ज्ञान प्राप्त कर मुक्ति का वर्णन ।