Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
दामव्यालकुटुम्बैस्तैस्तदैव यमकिङ्करैः ।
प्रार्थितेन यमेनोक्तमिदं श्रृणु रघूद्वह ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्टजी ने कहा : हे श्री रामचन्द्रजी ! दाम, व्याल और कट के बान्धवरूप उन यम किकरो ने
उसी समय यम से विनती की । उनके विनय करने पर यम ने यह कहा, उसे सुनिये