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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

यदा वियोगमेष्यन्ति श्रोष्यन्ति च निजां कथाम् । दामादयस्तदा मुक्ता भविष्यन्तीत्यसंशयम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जब ये दाम आदि वियोग को प्राप्त होंगे और शम्बर की माया से कल्पित जीवभावरूपता तथा वासनारहित अद्वितीय चिन्मात्ररूपता की अपनी कथा को सुनेंगे, तब ये अपने यथार्थ तत्त्वको जानकर मुक्त हो जायेंगे