Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अधिष्ठानाभिधे तस्मिन्नेवान्तर्नगरे तदा ।
रत्नावलीविहाराख्यो विहारोऽपि भविष्यति ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी अधिष्ठान नाम के नगर के अन्दर उस समय रत्नावली विहार नाम
का विहार (क्रीडागृह) भी होगा