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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

यान्ति श्वभ्रं जलानीव स्वलाभं नाशयन्ति ते । स्वानुभूतिप्रसिद्धेन मार्गेणागमगामिना ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

ओपनिषद मार्ग के साथ अपने अनुभव का भी संवाद है, तार्किक मतों के साथ अनुभव का संवाद नहीं, ऐसा कहते है । हे श्रीरामचन्द्रजी, अपने अनुभव से प्रसिद्ध श्रुति के अनुसारी मार्ग से परम गति को जा रहे लोगों का विनाश नहीं होता