Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

राहुरप्यक्रमेणैवं पिबन्नप्यमृतं मृतः । सच्छास्त्रसाधुसंपर्कमर्कमुग्रप्रकाशदम् ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

जो पुरुष उपनिषदादि सत्शास्त्र ओर उनके अनुसार चलनेवाले साधु-सज्जन पुरुषों के सर्म्पकरूपी सूर्य का, जो कि परमात्मा के साक्षात्कार का हेतु है, अवलम्बन करते हैं, वे मोहरूपी गाढ़ अन्धकार के वशवर्ती नहीं होते