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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

ब्राह्ममण्डमिवाखण्डं लोकेशाः पालयन्ति तम् । अप्यापदि दुरन्तायां नैव गन्तव्यमक्रमे ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

घोर आपत्ति में भी कुमार्ग में पैर रखना ही नहीं चाहिये । देखिये न, अनुचित रीति से अमृतपान करता हुआ भी महाबली राहु मृत्यु को प्राप्त हुआ