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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

गीतिभिर्गगनाभोगैस्ते जीवन्ति मृताः परे । परमं पौरुषं यत्नमास्थायादाय सूद्यमम् ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

किस प्रकार यश का सम्पादन किया जा सकता है ? इस पर कहते हैं। परमपौरुष-यत्न का अवलम्बन कर, सुन्दर उद्योग का ग्रहण कर उद्वेग के बिना शास्त्रानुकूल आचरण करता हुआ कौन पुरुष सिद्धि प्राप्त नहीं करता ?