Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

यथाशास्त्रमनुद्वेगमाचरन्को न सिद्धिभाक् । यथाशास्त्रं विहरता त्वरा कार्या न सिद्धिषु ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

शास्त्रानुसार कार्य कर रहे पुरुष को सिद्धियों के लिए त्वरा नहीं करनी चाहिए, क्योकि चिरकाल में परिपक्व हुई सिद्धि उत्तम फल देती है