Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
आत्मज्ञानमशेषाणां सुखदुःखदशादृशाम् ।
मूलकाषकरं तस्माद्भाव्यं तत्रातिशायिना ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मज्ञान सम्पूर्ण सुख-दुःख, जन्ममरण आदि अवस्थाओं की भ्रमदृष्टियों का
मूलोच्छेद करनेवाला है, इसलिए आत्मज्ञान में ही आपको शुभोद्योग का अभ्यास करना चाहिये