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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

न सोऽस्त्यतिशयो लोके यस्यास्ति न फलं स्फुटम् । भवितव्यं विचार्यान्तः सर्वातिशयशालिना ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस लोक मे ऐसा कोई शास्त्रीय सुखद्योग का उत्कर्ष नहीं हे, जिसका स्फुट फल हो । शंका : विविध उद्योग आपने दिखलाये हैं, उसमें से मुझे किसमें अधिक प्रयत्नवान होना चहिए। समाधान : अधिकारी आपको मूढ की नाई क्षुद्र फलों की प्रार्थना से व्यर्थ नहीं होना चाहिए, किन्तु मन में फल के तारतम्य का विचारकर सबसे उत्कृष्ट फल की प्राप्ति से सर्वोत्कृष्ट शुभ प्रयत्न से सुशोभित होना चाहिये