Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
लोभमोहरुषां यस्य तनुतानुदिनं भवेत् ।
यथाशास्त्रं विहरति स्वस्वकर्मसु सज्जनः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
सज्जन का लक्षण कहते हैं।
जिसके सेवन से प्रतिदिन लोभ, मोह और क्रोध क्षीण होते हैं और जो अपने कर्मों में शास्त्रानुसार
आचरण करता है, वह सज्जन है