Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अथात्मविदुषां सङ्गात्तस्य साधोः प्रवर्तते ।
अत्यन्ताभाव एवास्य यथा दृश्यस्य दृश्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
सदा सज्जन की सेवा में तत्पर पुरुष की कभी आत्मज्ञानी के साथ भी अवश्य संगति हो जाती है,
जिससे ज्ञानप्राप्ति होती है, ऐसा कहते हैं।
सज्जनों की संगति से सज्जनसेवी पुरुष का आत्मज्ञानी के साथ संग होता है, जिससे इस दृश्य
का अत्यन्तअभाव ही उसे दिखाई देता है