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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अहमादिजगद्दृश्यं किल नास्त्येव वस्तुतः । अवश्यमेव तत्तस्माच्छिष्यतेऽहंविचारतः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

दृश्य अहमादि जगत वस्तुतः है ही नहीं यानी बाधित है। शंका : परिज्ञात होने पर अहमादि जगत का बाध हो जाता है, तो क्या रहता है ? समाधान : यह अहं पदार्थ क्या है ? यों प्रमाणपूर्वक विचार करने से उत्पन्न हुए ज्ञान से वह चिदाकाश अवश्य ही परिशिष्ट रहता हे, उसका बाध नहीं होता