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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

सर्वोत्कर्षेण संपन्ना देवा अपि विमर्दिताः । दानवैर्दानवार्थाढ्यैर्गजैः पद्माकरा इव ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

सेना और धन-धान्य से सम्पन्न बलि आदि दानवं द्वारा जैसे हाथियों द्वारा कमल के सरोवर कुचले जाते हैं वैसे ही कुचले गये देवता अतिशय प्रयत्न से सर्वोत्कृष्ट हो गये