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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

मरुत्तनृपतेर्यज्ञे संवर्तेन महर्षिणा । ब्रह्मणेवापरः सर्गो भावितः ससुरासुरः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा मरुत्त के यज्ञ में संवर्तनामक महर्षि ने ब्रह्मा की तरह सुर और असुरो से पूर्ण दूसरी सृष्टि की (& )