Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
महातिशययुक्तेन विश्वामित्रेण विप्रता ।
भूयोभूयः प्रयुक्तेन दुष्प्रापा तपसार्जिता ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
शास्त्रीय महान शुभ उद्योग से युक्त
विश्वामित्रजी ने बार-बार की गई कठोर तपस्या से दुष्प्राप्य ब्राह्मणता प्राप्त की