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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

पिष्टसेकाम्बु दुष्प्रापं रसायनवदश्नता । दुर्भगेनेदृशेनाप्तः क्षीरोद उपमन्युना ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रकार के भाग्यहीन उपमन्यु ने भी तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शंकर के प्रसाद से क्षीरसागर प्राप्त किया (इसकी कथा महाभारत में प्रसिद्ध है)