Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
त्रैलोक्यमल्लांस्तृणवदश्नन्विष्ण्वलजादिकान् ।
भक्त्यातिशयदार्ढ्येन कालः श्वेतेन कालितः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
तीनों लोकों मे महाबली रूप से विख्यात विष्णु,
ब्रह्मा आदि देवाधिदेवो को भी तृण की नाई निगल रहे काल को अत्यन्त दृढ भक्ति से श्वेत ऋषि ने
अपने वश में कर लिया । (यह भी लिंग पुराण में प्रसिद्ध है)