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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

अहंकारपिशाचेन गृहीतो यो नराधमः । न शास्त्राणि न मन्त्राश्च तस्याभावस्य सिद्धये ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस अधम पुरुष को अहंकाररूपी पिशाच ने चंगुल में फसा लिया, उसके अंहाकाररूप पिशाच को निवृत्त करने के लिए न शास्त्रों में सामर्थ्य है और न मन्त्रो में ही