Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verses 42–43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verses 42–43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
केनोपायेन भगवन्नहंकारो न वर्धते ।
तं त्वं कथय मे ब्रह्मन्संसारभयशान्तये ॥ ४२ ॥
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
चिन्मात्रदर्पणाकारे निर्मले स्वात्मनि स्थिते ।
इति भावानुसंधानादहंकारो न वर्धते ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्, किस उपाय से अहंकार नहीं बढ़ता ? हे ब्रह्मन् संसाररूपी भय
की निवृत्ति के लिए आप वह उपाय मुझसे कहने की कृपा कीजिये