Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
अनेनाभिहतो जन्तुर्न भूयः परिरोहति ।
रिपुणानेन बलिना विविधाधिप्रदायिना ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
विविध प्रकार की मानसिक दुश्चिन्ता आदि दुःख देनेवाले इस बलवान शत्रु से आहत
हुआ जीव अपरिच्छिन्न स्वभाव से फिर आविर्भूत नहीं होता