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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 61

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 61

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । तृतीयां लौकिकीमेतां त्यक्त्वा चित्तादहंकृतिम् । किंभावः पुरुषो ब्रह्मन्प्राप्नुयादात्मनो हितम् ॥ ६१ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्‌, इस तीसरे लौकिक अहंकार को चित्त से हटाकर किस प्रकार की स्थितिवाला पुरुष अपने हित परम तत्त्व को प्राप्त होता है ?