Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 33, Verse 67
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 33, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 33 · श्लोक 67
संस्कृत श्लोक
भावादहंकृतिं त्यक्त्वा स्थूलामेतां हि लौकिकीम् ।
तिष्ठन्व्यवहरन्वापि न नरः प्रपतत्यधः ॥ ६७ ॥
हिन्दी अर्थ
विचार से इस स्थूल लौकिक अहंकार का त्याग करके पुरुष चाहे चुपचाप
बैठा रहे या लौकिक व्यवहार करे, फिर भी उसका अधःपतन नहीं होता