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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अत्र ते श्रृणु वक्ष्यामि दामादिषु गतेष्वथ । यद्वृत्तं शम्बरस्यैव नगरे नगसंनिभे ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

भी बन्धन में नहीं डाल सकते, इस विषय में भीम, भास और दृढ़ का न्याय दृष्टान्त रूप से दशति है। दाम आदि दानवो के चले जाने पर सम्पत्ति से मेरुपर्वत के तुल्य शम्बर के नगर में जो कुछ वृत्तान्त हुआ, उस विषय में मैं आपसे कहूँगा, आप सुनिये