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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verses 19–20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verses 19–20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 19,20

संस्कृत श्लोक

भीमभासदृढक्षुण्णा जाता गीर्वाणवाहिनी । परिदुद्राव वेगेन गङ्गेव हिमवच्च्युता ॥ १९ ॥ सा सुरानीकिनी देवं क्षीरोदार्णवशायिनम् । जगाम शरणं शैलं वातार्तेवाब्दमालिका ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

भीम, भास ओर दृढ से नष्ट की गई देवताओं की सेना हिमालय से गिरी हुई गंगा की तरह बड़े वेग से भागी। भागी हुई वह देवताओं की सेना जैसे वायु से छिन्न-भिन्न की गई मेच पंक्ति पर्वत की शरण में जाती हे वैसे ही क्षीरसागरशायी भगवान विष्णु की शरण में गई