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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

हरिराश्वासयामास तां भीतां देववाहिनीम् । भुजङ्गाभिवृतामेकां रमणीमिव नायकः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे व्यभिचारी पुरुषों के उपभोग से आक्रान्त अतएव भयभीत अकेली नायिका को नायक आश्वासन देता है वैसे ही भयभीत हुई उस देवसेना को भगवान श्रीहरि ने आश्वासन दिया