Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तस्माद्वासनया बद्धं मुक्तं निर्वासनं मनः ।
राम निर्वासनीभावमाहरस्व विवेकतः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, वासना से युक्त मन बन्धन को प्राप्त होता है ओर वासनारहित मन मुक्ति को
प्राप्त होता है, इसलिए आप विवेकपूर्वक निर्वासनिकता का अवश्य सम्पादन कीजिये