Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
आत्मैवेदं जगत्सर्वं कः किं भावयतु क्व वा ।
भावना नाम नास्त्वेव तदेतत्सम्यगीक्षणम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
यह सम्पूर्ण जगत आत्मा ही है, इसलिए कौन किस वस्तु की कहाँ पर भावना
करे ? भावना भी है ही नहीं, इसलिए स्वप्रकाश चिन्मात्र का ही दर्शन सम्यग् दर्शन है