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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

दामव्यालकटाकारैश्चेतः परिणतं यथा । भीमभासदृढन्यायो राघवास्त्वचलस्तव ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

वैसे ही ब्रह्मात्मभावना से भीम, भास और दृढ़ का न्याय आपके हृदय में अचल हो