Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 34, Verses 32–33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 34, verses 32–33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 34 · श्लोक 32,33
संस्कृत श्लोक
वासनावलितं चित्तमिह स्थितिमुपागतम् ।
तदेव तद्विनिर्मुक्तं विमुक्तमिति कथ्यते ॥ ३२ ॥
नानाघटपटाकारैश्चेतःस्थितिमुपागतम् ।
तदेवाशु शमं नेयं मिथ्यायक्ष इवोत्थितः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
वासना से युक्त चित्त यहाँ पर चित्तरूप से स्थिति को प्राप्त हुआ हे । वही वासना से मुक्त
होकर जीवन्मुक्त कहा जाता है | विविध घट, पट के आकारों से चित्त स्थिति को (सत्ता को) प्राप्त
हुआ है। बालक के उदित हुए यक्ष के समान उसीका शीघ्र विनाश कर देना चाहिये