Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 35, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
विकल्पकलुषा या स्याच्चित्तत्त्वस्यात्मविस्मृतिः ।
मन इत्युच्यते सेयं वासना भवभागिनी ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
इस मन का क्या स्वरूप है जिसका कि अवश्य उच्छेद करना चाहिये । इस प्रश्न पर कहते हैँ ।
चित्तत्त्व की विविध विकल्पों से कलुषित हुई जो स्वरूप विस्मृति हे, वही मन शब्द से कही जाती
हे । वही विविध जन्म को देनेवाली वासना है । भाव यह कि आत्मस्वरूप की विस्मृति से होनेवाली
विविध विकल्प वासनाएँ ही मन का स्वरूप हे