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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 35, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

श्रूयतां ज्ञानसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम् । भोगेच्छामात्रको बन्धस्तत्त्यागो मोक्ष उच्यते ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

मनोनिग्रह के उपायों में भोगेच्छा का त्याग ही मुख्य उपाय है, ऐसा कहते हैं। ज्ञानसर्वस्व का श्रवण कीजिये ओर श्रवण कर उसे हृदय में धारण कीजिये । भोग की इच्छा ही बन्धन हे ओर भोग की इच्छा का त्याग मोक्ष कहा जाता हे