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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 35, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 52

संस्कृत श्लोक

संकल्पकल्पितत्वाच्च मनोरूपमसन्मयम् । असन्मयविनाशे तु कः शोको वद राघव ॥ ५२ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे, अत्यन्त प्रिय, मन बुद्धि आदि द्वैत के सत्य होने से और आत्मा के उपकरण होने से उनका नाश होने पर धनादिनाश के समान शोक ही होगा ? तो इस पर कहते हैं। मन का स्वरूप संकल्प से कल्पित है, इसलिए वह असन्मय है हे श्रीरामचन्द्रजी, भला बतलाइये तो सही, असन्मयवस्तु का नाश होने पर क्या कभी किसी को शोक हो सकता है 2