Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 35, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 35, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 35 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
भवत्यपगताक्षेपः सर्वगः सर्वनायकः ।
निर्वासनः शान्तमनाः स्वदेहनगरेश्वरः ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
देहरूपी नगर का अधिपति यानी जीव संकोचरहित, सर्वव्यापक और सबका अधिपति हो जाता है