Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 36, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
नवतामनुगृह्नाति शक्रबाणासनेन च ।
यो यो भवत्यविरतं संस्थानेन वनेन च ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इन्द्रधनुष के वृक्षों में
नवीनता का सम्पादन करता हुआ वह चित्तत््व ही अवयवों से ओर समूह से जो-जो भाव निरन्तर होते
हैं उन पर अनुग्रह करता हे