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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 36, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

न जहाति स्वमर्यादां कालो युगमयीमिमाम् । तरङ्गिणीतरङ्गौघलीलया यान्ति सृष्टयः ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

वर्ष, युग आदिरूप से भी वित्तत्व ही सृष्टि आदि की मर्यादा रखता है, ऐसा कहते हैँ । वर्ष आदिरूप कालरूप से वही अपनी इस युगमयी मर्यादा को नहीं छोड़ता सृष्टियाँ नदियों की तरंगों के समूहों की तरह जाती हैं