Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 36, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
सर्वसंकल्परहिता सर्वसंज्ञाविवर्जिता ।
सैषा चिदविनाशात्मा तच्चेत्यादिकृताभिधा ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
ॐ भूतेन्द्रिय मनोबुद्धिवासनाकर्मवायवः । अविद्या चाष्टकं प्रोक्तं पुर्यष्टमृषिशत्तमैः ॥
पुर्यष्टकशब्द से श्लोकोक्त भूत आदि आठ कहे जाते हैँ ।
उस चिति की प्रतिबिम्बता प्रतिबिम्बाधीन काम, संकल्प, नाम और रूप से युक्त होने के कारण
वास्तविक नहीं है, ऐसा कहते हैं।
वह चिति सब संकल्पं से रहित, सब नामों से शून्य ओर अविनाशी स्वरूप है।
शंका : तव उसकी जीवादि संज्ञा किसके कारण हुई।
समाधान : उसके आधीन चेत्य तथा चिदाभास से ही उसकी जीवादि संज्ञा हुई है