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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 36, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 36, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

जलधिष्ठिततत्तेजो यथाङ्ग प्रतिबिम्बति । तथा पुर्यष्टकेष्वेव चिद्धि देहेषु लक्ष्यते ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि कोई कहे ऐसी अवस्था में सूक्ष्म चिति घट आदि की तरह देह मे भी नहीं दिखाई देनी चाहिये; पर दिखाई देती है, इसमें क्या कारण है ? इस पर कहते हैँ । हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे जल में संयुक्त किरण स्पष्ट नहीं दिखाई देती, प्रतिविम्बरूप से तो स्पष्ट दिखाई देती है वैसे ही पुर्यष्टकरूप (४) देहो में ही चिति दिखाई देती है, घटादि में नहीं दिखाई देती