Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 38, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 38, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
मनो यत्करोति तत्कृतं भवति यन्न करोति तन्न कृतं भवति अतो मन एव कर्तृ न देहः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
मन जो
करता है, वही कृत होता है । जो नहीं करता, वह कृत नहीं होता, इसलिए मन ही कर्ता है, देह कर्ता नहीं
हे